OMSS बिक्री के बावजूद गेहूं के बाजार में तेजी आने की उम्मीद
किसान और व्यापारी भाइयों, कल FCI ने OMSS के तहत 1 लाख मीट्रिक टन गेहूं की ई-नीलामी की थी, जिसमें से लगभग 90% गेहूं बिक गया और इसमें सबसे बड़ा हाथ पंजाब और हरियाणा का है। हरियाणा के खरीदारों ने 11085 मीट्रिक टन गेहूं खरीदने के लिए बोली लगाई थी, लेकिन सरकार द्वारा तय 9500 मीट्रिक टन गेहूं की मात्रा की वजह से खरीदारों को केवल 9500 मीट्रिक टन ही दिया गया और उच्चतम बोली 2760 रुपये प्रति क्विंटल की लगी है। दूसरी तरफ, पंजाब के खरीदारों ने भी 26595 मीट्रिक टन गेहूं खरीदने के लिए बोली लगाई थी, लेकिन सरकार ने 23920 मीट्रिक टन ही पास किया और पंजाब में 95.68% ही गेहूं बिका है, जहाँ उच्चतम बोली 2750 रुपये की लगी है। वर्तमान में पंजाब की मंडियों में गेहूं का भाव 2650 से 2700 रुपये चल रहा है। ऊँची बोली लगने के कारण कल पंजाब की मंडियों में तेजी देखने को मिल सकती है। इस समय पंजाब पूरी तरह से सरकारी गेहूं पर निर्भर है और मांग भी जबरदस्त बनी हुई है।

कल कई राज्यों में 100% गेहूं की खरीद हुई है, जैसे हरियाणा, असम, बिहार, दिल्ली, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और वेस्ट बंगाल में पूरा माल बिक गया। दिल्ली में भी उच्चतम बोली 2746 रुपये की देखने को मिली है। इस समय नीलामी के आंकड़ों पर नजर डालें तो हरियाणा, पंजाब और बिहार में गेहूं की मांग निकल रही है। बिहार की तरफ से उच्चतम बोली 2912 रुपये की लगाई गई थी जो मजबूत मांग को दर्शाती है। कुल मिलाकर ऊँची बोली लगने के कारण कल शाम को दिल्ली मंडी में गेहूं की कीमतें 25 रुपये की तेजी के साथ 2875 रुपये पर बंद हुई हैं। हमारा मानना है कि अगर सरकार अगले MTF में गेहूं की मात्रा नहीं बढ़ाती है, तो कीमतों में कुछ और तेजी बन सकती है। आगे की तेजी-मंदी सरकारी नीतियों पर टिकी हुई है। अगर सरकार नीतियों में कोई बदलाव नहीं करती है, तो कीमतों में सुधार की उम्मीद बनी रहेगी और अगर सरकार कोई बदलाव करती है, तो कीमतें 50-60 रुपये गिरकर एक सीमित दायरे में घूमती रहेंगी।