किसान और व्यापारी भाइयों, इस बार गेहूं को स्टॉक करना मुनाफे का सौदा साबित नहींहुआ। इस सीजन में गेहूं की कीमतें 2900 के स्तर को भी नहीं छू पाई हैं, जबकि पिछलेसाल महाकुंभ मेले के कारण जबरदस्त डिमांड थी, जिसके चलते कीमतें इन दिनों 3000से 3100 तक पहुंच गई थीं। लेकिन इस बार गेहूं के बाजार में तेजी के आसार न के बराबरनजर आ रहे हैं और इसके पीछे कई कारण हैं, जैसे गेहूं का रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन औरसरकार की अच्छी नीतियों के कारण हुई अच्छी खरीद। पिछले सीजन में बढ़े हुए भावों कोदेखते हुए इस सीजन की शुरुआत से ही प्राइवेट सेक्टर द्वारा भी भारी मात्रा में गेहूं कीखरीद की गई है।

पिछले एक-डेढ़ महीने से गेहूं की कीमतें 2750 से 2820 के दायरे में हीघूम रही हैं, क्योंकि चौतरफा गेहूं का बड़ा स्टॉक होने की वजह से भरपूर सप्लाई बनी हुई हैऔर मांग इस बार खास नहीं है। मिलर्स और व्यापारी दोनों जरूरत अनुसार ही व्यापार कररहे हैं, जिससे मांग सीमित ही चल रही है। लेकिन अब गेहूं के बाजार में कुछ सकारात्मकखबरें मिल रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिसंबर महीने के अंत तक सरकार की तरफ सेगेहूं के उत्पादों का निर्यात खोलने का फैसला लिया जा सकता है। बाजार में गेहूं की मांगबनाए रखने के लिए इसके कुछ हिस्से को निर्यात की तरफ मोड़ना जरूरी लग रहा है;हालांकि गेहूं से बने उत्पादों का निर्यात खुलने से कीमतों में कोई बहुत बड़ी तेजी तो नहींआएगी, लेकिन यह भावों को और नीचे गिरने से रोकने में एक बड़े सहारे का काम जरूरकरेगा। इसके बावजूद, अगर भारतीय गेहूं के निर्यात की अनुमति मिल भी जाती है, तो भीइसका बड़े पैमाने पर बाहर जाना मुश्किल लग रहा है क्योंकि वैश्विक स्तर पर गेहूं के दामफिलहाल काफी कम हैं और भारतीय गेहूं का भाव अंतरराष्ट्रीय मार्केट के हिसाब से महंगापड़ रहा है, जिससे निर्यात का मुनाफा फिलहाल सही नहीं बैठ रहा है। इस साल गेहूं केव्यापार में घाटा होने की वजह से अगले सीजन में व्यापारी बहुत ही संभलकर और कमखरीदारी करेंगे, और अगर सरकार अपनी खरीद बढ़ाती भी है, तो उसके सामने इस भारीमात्रा में गेहूं को सुरक्षित रखने की एक बड़ी चुनौती होगी। कुल मिलाकर किसी भी तरीकेसे गेहूं की कीमते 2900 से ऊपर जाने की उम्मीद नहीं दिख रही है और रही दिसंबर महीनेकी बात, तो डिमांड और सप्लाई का संतुलन देखते हुए कीमतें 25 से 50 रुपये की तेजी-मंदी के सिमित दायरे में ही घूमती रहेंगी, लेकिन गेहूं से बने उत्पादों के निर्यात खोलने कीखबरों से हल्का-फुल्का सुधार भी देखने को मिल सकता है। बाकि व्यापार अपने विवेक सेकरे और रोजाना के भाव