गेहूं का टेंडर न होने की वजह से गेहूं की कीमतों में लोटी तेजी

गेहूं का टेंडर न होने की वजह से गेहूं की कीमतों में लोटी तेजी

किसान और व्यापारी भाइयो, सरकार की तरफ से OMSS के तहत गेहूं का टेंडर न होने की वजह से गेहूं की कीमतों में ₹30 से ₹40 तक की तेजी देखने को मिल रही है। दिल्ली मंडी में गेहूं की कीमतों में दो से तीन दिनों में ही ₹35 तक की तेजी आ चुकी है और कल भी भाव ₹10 तेज होकर ₹2770 पर पहुंच गया है। अगर ओएमएसएस के तहत गेहूं का टेंडर नहीं होता है, तो दिल्ली में गेहूं की कीमतें फिर से ₹2800 तक पहुंच सकती हैं। कल उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र और हरियाणा के अधिकांश बाज़ारों में आटा, मैदा और सूजी के भाव जहाँ स्थिर रहे, वहीं गोरखपुर और लखनऊ में ये भाव ₹40 तक मज़बूत हो गए, जबकि गोरखपुर मंडल में गेहूं के भाव में ₹30 की तेज़ी दर्ज हुई। इस बीच, मध्य प्रदेश और गुजरात की अधिकांश मंडियों में गेहूं के भाव क्रमशः ₹20 और ₹15 तक मज़बूत बने रहे, जबकि मध्य प्रदेश की मिलों में आटा, मैदा और सूजी के भाव स्थिर रहे।

गेहूं का प्राइवेट और सरकारी दोनों का स्टॉक भारी मात्रा में हुआ है और फ़िलहाल ढीली मांग की वजह से कीमतों में बड़ी तेजी आने की उम्मीद नहीं है। हालाँकि, जनवरी में गेहूं की खपत बढ़ती है, जिसकी वजह से जनवरी में कीमतों में ₹50 से ₹75 तक की तेजी देखने को मिल सकती है। फ़िलहाल इस समय बाज़ार में सतर्क बिकवाली का माहौल है, जहाँ पिछले हफ़्तों में स्टॉक किए गए गेहूं को कुछ लोग घबराहट में बेच रहे हैं, और खरीददार सक्रिय नहीं हैं, जिस कारण रेक मूवमेंट लगभग ठप्प है। गेहूं से बने उत्पादों के निर्यात करने की मंजूरी पर सरकार अभी विचार कर रही है। जब तक इसका नोटिफिकेशन जारी नहीं हो जाता, तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता कि सरकार निर्यात खोलेगी या नहीं, क्योंकि यह खबरें पिछले डेढ़-दो महीने से चली आ रही हैं। गेहूं के टेंडर में देरी होने के कारण फ़िलहाल कीमतों में हल्का-फुल्का और सुधार देखने को मिल सकता है। बाकि व्यापार अपने विवेक से करे

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