इस साल गेहूं की कीमतो में तेजी बन सकती है या नहीं

किसान और व्यापारी भाइयों, शुक्रवार को गेहूँ का टेंडर न होने के कारण शनिवार को दिल्ली मंडी में गेहूँ की कीमतें 20 रुपये तेज होकर 2760 पर वापस पहुँच गई है। पिछले साल इन दिनों गेहूँ की कीमतें 2900 से 3000 के बीच में चल रही थीं, लेकिन इस साल गेहूँ की अधिक उपलब्धता के कारण गेहूँ की कीमतें पिछले साल के मुकाबले में 200 से 250 तक नीचे चल रही हैं। OMSS की बात करें तो, सरकार ने खुले बाज़ार बिक्री योजना (OMSS) के तहत होने वाली गेहूँ की बिक्री को अस्थायी रूप से रोक दिया है। दरअसल, सरकार ने पहले हर सप्ताह गेहूँ बेचने की बात कही थी, लेकिन पहले टेंडर में गेहूँ की कम बिक्री को देखते हुए, उन्होंने अगले हफ़्ते दूसरा टेंडर जारी ही नहीं किया, बल्कि तीसरे हफ़्ते में जारी किया। इस रोक का मुख्य कारण यह है कि टेंडर में गेहूँ का उठाव बहुत कम रहा, क्योंकि बाज़ार में पहले से ही पर्याप्त माल मौजूद है और सरकारी गेहूँ के दाम स्थानीय बाज़ार के दामों से ज्यादा पड़ रहे थे। अभी यह तय नहीं है कि टेंडर के तहत गेहूँ की बिक्री फिर से कब शुरू होगी,
हालाँकि बाज़ार में खबर चल रही है कि 15 दिन में एक बार सरकार गेहूँ बेच रही है, तो पिछला टेंडर 26 नवंबर को हुआ था, तो हो सकता है अगला टेंडर 10 या 11 दिसंबर को हो सकता है। 12 नवंबर से शुरू हुए दो टेंडरों में सरकार ने कुल 4 लाख टन गेहूँ की पेशकश की थी, लेकिन बिक्री सिर्फ 1,48,599 टन ही हो पाई, जो कुल पेशकश का आधा भी नहीं है। ऐसा लगता है कि अब जब भी सरकार अगला टेंडर लाएगी, तो बिक्री की मात्रा बढ़ाने के लिए भाव पहले के टेंडरों से कुछ कम रखे जाने की संभावना है। कुल मिलाकर इस साल गेहूँ की कीमतों में बड़ी तेजी या मंदी की संभावना कम है; सीमित डिमांड और पर्याप्त सप्लाई के चलते कीमतें 50 से 75 रुपये की तेजी-मंदी के दायरे में घूमती रहेंगी। हालाँकि, अगर सरकार गेहूँ से बने उत्पादों के निर्यात को खोल देती है, तो कीमतों में 50 से 100 रुपये की तेजी देखने को मिल सकती है, पर उस पर अभी सरकार विचार कर रही है। बाकि व्यापार अपने विवेक से करे